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किती दुःख भोळे खुळे अन् अडाणी | मराठी गझल

kiti Dukha Bhole Khule an adaani, vasant Shinde marathi gazal,     
        
        अक्षरगण वृत्त, वृत्त =‍ भुजंगप्रयात
        लगावली = लगागा लगागा लगागा लगागा

        किती दुःख भोळे खुळे अन् अडाणी
        सुखाशी करू पाहते तोडपाणी.

        बळे झोपलेल्या उजेडापुढे या
        किती गायची रोज अंधार गाणी.

        ललाटी कुणी कोरली भाग्यरेखा
        दिसेना जराही छनीची निशाणी.

        अता सोसवेना मला भूक आई
        पुरे जाहली ही चिऊची कहाणी.

        पुरा होइना हट्ट माझ्या मुलाचा
        तुझी लेक आहे किती रे शहाणी.

        नका लोक समजू वृथा शायरी ही
        असे फाटक्या काळजाची विराणी.

        - वसंत शिंदे, सातारा.
          मो.नं.-९९२२७७६०२७
 

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